23 सितंबर 2012 - 20:30

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के विभाग में अटलांटिक परिषद थिंक टैंक के वरिष्ठ सदस्य "सर्वर काश्मेरी" के क़लम से एक लेख में लिखा है कि संयुक्त राष्ट्र के दो तिहाई सदस्य देश ईरान पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ़ और ईरान की परमाणु गतिविधियों का समर्थन करते हैं। ۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔

अहले बैत (अ) समाचार एजेंसी अबना की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के विभाग में अटलांटिक परिषद थिंक टैंक के वरिष्ठ सदस्य "सर्वर काश्मेरी" के क़लम से एक लेख में लिखा है कि संयुक्त राष्ट्र के दो तिहाई सदस्य देश ईरान पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ़ और ईरान की परमाणु गतिविधियों का समर्थन करते हैं। यह गुट निरपेक्ष आंदोलन के सोलहवें सम्मेलन के बाद ईरान की दूसरी बड़ी सफलता है जिसमें संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून सहित कई देशों के नेताओं ने भी भाग लिया। नतीजा यह निकलता है कि वह समय आ गया है कि अमेरिका समझने की कोशिश करे कि जो नीति उसने ईरान के खिलाफ अपनाई है वह सही नही है और उसे जनमत का आदर व सत्कार करना चाहिए।संयुक्त राष्ट्र के दो तिहाई सदस्य देश ईरान पर प्रतिबंधों को और उसके परमाणु कार्यक्रम के समर्थक हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के दो तिहाई सदस्य देशों ने ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के समर्थन में एक औपचारिक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं जिसमें ईरान पर एक पक्षीय अमेरिकी प्रतिबंधों का विरोध किया गया है।संयुक्त राष्ट्र के दो तिहाई सदस्य देशों की पहल को अमेरिका के लिए लाल बत्ती समझा जाता है जिसका उद्देश्य अमेरिका को चेतावनी देना और यह बताना है कि ईरान को अकेले और इस देश को परमाणु उपलब्धियों की इच्छा से लज्जित करने की कोशिश करते करते अमरीका खुद एकांत का सामना कर रहा है।तेहरान बैठक में "अमेरिका के मित्रों की" भागीदारीदुनिया के दो तिहाई देशों की ओर से यहाँ उनका प्रत्यक्ष समर्थन अगस्त के अंत में गुट निरपेक्ष देशों के सोलहवीें शिखर सम्मेलन के शुरू से ही शुरू हुआ और अगस्त 2012 के अंतिम सप्ताह के दौरान जारी रहा।जो लोग तेहरान में गुट निरपेक्ष आंदोलन की बैठक में शामिल हुए संयोग से अमेरिका के साथियों में उनकी गिनती की जाती थी, यह लोग खासकर उल्लेखनीय हैं भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जो 250 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान बैठक में शामिल हुए; अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई, क़तर के अमीर हम्द बिन खलीफा ऑले सानी, फ़ार्स की खाड़ी के सभी राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, मिस्र के राष्ट्रपति मोहम्मद मुरसी. जो ईरान में इस्लामी क्रांति के बाद पहले मिस्री राष्ट्रपति थे जिन्होंने ईरान का दौरा किया।चीन और भारत ने भी ईरान के परमाणु अधिकार का समर्थन कियाभारत भी एक परमाणु शक्ति है जिसने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और इस देश ने अभी तक आईएईए के निरीक्षणकर्ताओं को प्रतिष्ठानों का निरीक्षण नहीं करने दिया है। इसलिए इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है कि हिंदुस्तान ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों का विरोध कर रहा है। इस बैठक में चीन के प्रतिनिधिमंडल प्रमुख चीनी उप प्रधानमंत्री थे जिन्होंने शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक के लिए ईरान के अधिकार का समर्थन किया।